पूर्ण समर्पण क्या है ?

एक साधक के लिए “समर्पण” को ठीक से समझना अति आवश्यक है। तामसिक प्रवृति के लोग अक्सर समर्पण से यह समझ लेते हैं कि कुछ ना करो और सब भगवान पर छोड़ दो। परंतु समर्पण का अर्थ इससे बहुत परे है। गीता में श्री कृष्ण भी अर्जुन को पूर्ण रूप से समर्पित होने का उपदेश देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की अर्जुन अपने शस्त्रों का त्याग कर दे। वह युध लड़ते हुए, उस क्षण में जो भी उचित है, वह सब करते हुए भी पूर्ण रूप से भगवान कृष्ण को समर्पित रहे । साधो सत्संग में हमारे मित्र श्री अनीश ने समर्पण की एक सुंदर व्याख्या दी। सत्य की जिज्ञासा रखने वाले हर साधक को चाहिए की वह सभी परिस्थितियों के प्रति पूर्ण स्वीकृति रखते हुए अपनी विवेक शक्ति के द्वारा स्थिति अनिसार उचित कर्म करता चले।

For daily practice, the link to the 15 mins audio of breath-watching guided meditation (Hindi) is available here: